लखीमपुर खीरी हिंसा: क्या बिगड़ सकता है भाजपा का सियासी गणित, केंद्रीय नेतृत्व के सामने रास्ता क्या?
Aftab Khan,,, मानवाधिकार मीडिया AMMP 24 News: Date:04 Oct 2021 03:04 PM

सार
पिछले 10 महीने से चल रहे किसान आंदोलन के बीच लखीमपुर खीरी कांड ने सूबे की योगी सरकार के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी है। जहां प्रदेश सरकार अपनी उपलब्धियों के बल पर इस चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही थी, ठीक चुनाव से कुछ महीने पहले इस कांड ने भाजपा को नए सिरे से अपनी रणनीति तैयार करने के लिए मजूबर कर दिया है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी कांड में चार किसानों और एक पत्रकार समेत नौ लोगों की मौत के बाद प्रदेश की सियासत में नया बवाल मच गया है। इस सियासी बवाल के बीच किसान आंदोलन को लेकर पहले ही विपक्ष के निशाने पर आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार के खिलाफ प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, संजय सिंह से लेकर तमाम विपक्षी दलों के नेताओं ने आक्रमक रुख अपना लिया है।
रविवार को इस घटना के बाद से ही यहां सियासत तेज है और कई नेताओं को यहां पहुंचने से रोक दिया गया है। दरअसल लखीमपुर खीरी प्रदेश की सियासत का नया अखाड़ा बन गया है जहां हर सियासी पार्टी किसान आंदोलन के जरिए अपनी रणनीति को धार देने में लग गई है। ऐसे में क्या अगले चार महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर लखीमपुर खीरी की घटना योगी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।
भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं
किसान आंदोलन को लेकर पहले से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों की भाजपा के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही थी। माना जा रहा है कि इस घटना के बाद से भाजपा के लिए मुश्किल और बढ़ गई है। चार महीने बाद प्रदेश में चुनाव होने है, एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सरकार की उपलब्धियों को लेकर चुनाव में उतरने की तैयारी में लगे हैं। दूसरी तरफ इस घटना के लिए कथित तौर पर सीधे-सीधे केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा उर्फ मोनू मिश्रा को जिम्मेदार ठहराने से भाजपा विपक्ष के निशाने पर आ गई है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की घटनाओं से कोई भी सत्ता में रहते हुए बचना चाहती है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी का सीधे तौर पर नाम आ रहा है। ऐसे में इस घटना से भाजपा का पूरा सियासी गणित गड़बड़ होने की आशंका है। कहा जा रहा है कि महज यूपी ही नहीं बल्कि उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनाव पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।