मुरादाबाद के फर्नीचर कारोबारी के घर बुलडोजर चलाने के मामले में अपने ही बुने जाल में फंस गए एसडीएम बिलारी गंवाना पड़ा पद
Aftab Khan ×××××× Human Rights Media council AMMP 24 News Date:: Sun, 17 Jul 2022

आपको बता दें, मुरादाबाद: फर्नीचर कारोबारी से फर्नीचर लेने के बाद उसका भुगतान नहीं करने के लिए एसडीएम बिलारी घनश्याम वर्मा ने जो जाल बुना वह उसमें खुद ही उलझ गए। कारोबारी ने सभी साक्ष्य सहेजने और बिना डरे अपनी शिकायत पर अड़े रहने के कारण जिला प्रशासन को एसडीएम स्तर के अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करनी ही पड़ी।
बताते चलें कि। एसडीएम घनश्याम वर्मा ने कारोबारी से फर्नीचर लेने के साथ ही अन्य सुविधाएं भी ली थीं। कारोबारी जाहिद अहमद ने उन्हें बाजार मूल्य के बजाय लागत मूल्य पर फर्नीचर दिया था। एसडीएम घनश्याम वर्मा का दिल यह कीमत भी देने की गवाही नहीं दे रहा था। कारोबारी द्वारा बार-बार रुपये मांगे जाने पर पहले तो उन्होंने उसे धमका दिया।
जब बात नहीं बनी तो उन्होंने कारोबारी को रुपये न देने के लिए पूरी साजिश ही रच डाली। इसके बाद उन्होंने अपने लेखपाल और अन्य कर्मचारियों से कारोबारी के घर और कारखाने का रिकार्ड निकलवाया। कर्मचारियों ने उन्हें नक्शे के आधार पर बताया कि कारोबारी के मकान का कुछ हिस्सा तालाब की जमीन पर कब्जा करके बनाया गया है। बस फिर क्या था, उन्होंने फर्नीचर कारोबारी को मकान पर बुलडोजर चलाने की धमकी दी डाली।
जाहिद अहमद इससे डरने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों के पास शिकायत लेकर पहुंचे। 11 जुलाई को मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह से शिकायत की। मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी को जांच कर सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इधर, जांच के आदेश हुए, उधर एसडीएम ने जाहिद अहमद के घर पर बुलडोजर चलवा दिया। बुलडोजर चलने के बाद जाहिद अहमद ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करने के साथ एसएसपी कार्यालय में शिकायती पत्र दिया।
वहीं, एसडीएम घनश्याम वर्मा ने नगर पालिका की गाड़ी से फर्नीचर पांच जुलाई को हरदोई में डिप्टी जेलर बेटी अलका वर्मा के घर भिजवाया था। फर्नीचर हरदोई भिजवाने में जीएसटी के नियमों का पालन हुआ कि नहीं अभी यह भी जांच का विषय है। इसके साथ ही जो बिल कारोबारी द्वारा दिए गए हैं, उनकी भी जांच कराई जा रही है। इसके लिए विस्तृत जांच में जीएसटी अधिकारी को शामिल करने की सिफारिश की गई है।
एडीएम ने शनिवार को भी बिलारी जाकर जांच कराई। अभिलेखागार से कपड़े वाला नक्शा निकालकर एक-एक बिंदु की पड़ताल हुई। जो जमीन तालाब वाली दिखाई गई थी, वह आसामी के नाम पर है। बाद में इस पर तालाब बना। तालाब बनने के बाद इस भूमि को तालाब में दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। यह सरकारी कार्य नगर पालिका को कराना था।
अगर तालाब पर कब्जे की जांच और कार्रवाई होती तो वह नगर पालिका स्तर पर होती है। नियमानुसार नगर पालिका की ओर से कब्जा करने वाले को नोटिस दिया जाना चाहिए था। अगर नोटिस के बाद भी जमीन खाली नहीं की जाती तो बुलडोजर चलवाने का कार्य नगर पालिका का है। इस प्रकरण में एसडीएम द्वारा भेजी गई टीम ने बिना पड़ताल किए बस जाहिद अहमद के मकान की दीवार को गिराना शुरू कर दिया। कार्रवाई में उन्होंने 80 मीटर पर कब्जा दिखाया था, जबकि नक्शे के अनुसार इसके एक बटा दस हिस्सा ही अतिरिक्त मिला। बस यहीं से एसडीएम अपने बुने जाल में फंस गए।
इस प्रकरण में जब एसडीएम ने खुद को फंसा हुआ महसूस किया तो कारोबारी पर समझौते के लिए दबाव बनाया जाने लगा। जाहिद हुसैन के जानकारों के समझौते के लिए भेजा गया। इसके साथ ही अलग-अलग जगह से गलत तरीके से दबाव बनाने का के लिए धमकी दी गई। जाहिद हुसैन ने बिना दबाव में आए कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह ने बताया कि एसडीएम की कार्य प्रणाली पहले से ही उचित नहीं थी। मुख्यमंत्री के लगातार जीरो टालरेंस नीति पर कार्य करने के बावजूद एसडीएम ने कई बार नियमों के विपरीत जाकर कार्य किया। अब जिला प्रशासन ने सहायक आयुक्त को रिपोर्ट उपलब्ध करा दी है। अब उस रिपोर्ट को देखने के स्थानीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई के साथ शासन को भेजा जाएगा।
कमिश्नर आन्जनेय कुमार सिंह ने जिलाधिकारी को आदेश दिया था कि वह ADM स्तर के अधिकारी से एसडीएम पर लगे आरोपों की जांच कराकर तीन दिन में रिपोर्ट दें। ADM प्रशासन सुरेंद्र सिंह ने शुक्रवार और शनिवार को बिलारी जाकर मामले की जांच की।
मौके पर जांच कराने के साथ ही ADM ने संबंधित लोगों और SDM के बयान भी दर्ज किए। जांच पूरी होने के बाद ADM प्रशासन ने देर शाम अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी। इसके बाद DM शैलेंद्र कुमार सिंह ने SDM घनश्याम वर्मा को बिलारी से हटाकर मुख्यालय से अटैच कर दिया। D